रोम, 23 अगस्त (हि.स.)। इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने अपने देश की वैश्विक भूमिका को लेकर बड़ा बयान दिया है। मेलोनी ने कहा कि उन्हें ऐसा इटली पसंद नहीं है जो किसी के आगे झुके या खुद को दूसरे देशों से कमतर समझे। उन्होंने कहा कि इटली को दुनिया में फैसले लेने वाली प्रमुख शक्तियों के साथ बैठकर अपनी दिशा तय करनी चाहिए।
तुर्किए की सरकारी समाचार एजेंसी अनाडोलू
के अनुसार, एक अखबार काे दिए इंटरव्यू में मेलोनी ने कहा कि उनका लक्ष्य इटली में “गर्व की क्रांति” लाना है। उन्होंने जोर दिया कि देश को अपनी ताकत और हितों को ध्यान में रखते हुए वैश्विक मंच पर अधिक प्रभावशाली भूमिका निभानी चाहिए।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपने संबंधों को लेकर भी मेलोनी ने खुलकर बात की। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें उम्मीद थी कि ट्रंप के साथ काम करना आसान होगा क्योंकि दोनों कई मुद्दों, खासकर इमिग्रेशन पर समान विचार रखते हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि वास्तविकता उनकी उम्मीदों से अलग रही।
मेलोनी ने कहा कि ट्रंप के साथ उनके रिश्ते हमेशा आसान नहीं रहे और एक समय ऐसा भी आया जब दोनों नेताओं के बीच कई हफ्तों तक बातचीत नहीं हुई। ट्रंप द्वारा पोप लियो की आलोचना किए जाने के बाद दोनों के बीच तनाव की खबरें सामने आई थीं। मेलोनी ने इस मुद्दे पर ट्रंप की आलोचना करने वाले शुरुआती यूरोपीय नेताओं में शामिल होकर अपनी असहमति जाहिर की थी।
मेलोनी ने कहा कि वह पश्चिमी देशों की एकता को बेहद महत्वपूर्ण मानती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इटली की विदेश नीति को वह अपने निजी रिश्तों के आधार पर तय नहीं करतीं।
जब उनसे पूछा गया कि क्या गर्मियों की छुट्टियों के बाद उनकी ट्रंप से दोबारा बातचीत होगी, तो मेलोनी ने कहा, “देखते हैं।”
इटली की वैश्विक भूमिका को लेकर मेलोनी ने कहा कि उनका देश फ्रांस और जर्मनी के लिए “स्पेयर व्हील” की भूमिका में नहीं रह सकता। उनके मुताबिक, इटली को उन देशों के साथ बैठना चाहिए जो यूरोप और दुनिया की दिशा तय करते हैं। उन्होंने स्थिरता को भी महत्वपूर्ण बताया और कहा कि स्थिरता अंतिम मंजिल नहीं बल्कि आगे बढ़ने की शुरुआत है।
मेलोनी ने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि वह इस मुकाम तक इसलिए पहुंच सकीं क्योंकि उन्होंने ऐसे समय में भी इतिहास के उस पक्ष के साथ खड़े होने का साहस दिखाया, जो आसान या लोकप्रिय विकल्प नहीं था। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर “धारा के विपरीत चलने” का फैसला करना भी नेतृत्व का हिस्सा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी




