भागलपुर, 11 अगस्त । जिले के गोपालपुर विधानसभा अंतर्गत आने वाली नवगछिया-तिनटंगा जहाज घाट रोड (14 नंबर सड़क) इस समय अपनी बदहाली के चरम पर है। सुशासन और चकाचक सड़कों के दावों के बीच यह महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग पूरी तरह जर्जर होकर तालाब में तब्दील हो चुका है।
कहलगांव और तिनटंगा के बीच हाल ही में शुरू हुए मालवाहक जहाजों के परिचालन के कारण इस मार्ग पर भारी वाहनों का दबाव काफी बढ़ गया है, लेकिन सड़क का बुनियादी ढांचा इस बोझ को उठाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है।
वर्तमान में तिनटंगा करारी, गोपालपुर पेट्रोल पंप के पास, लत्तीपाकर और चपरघाट मोड़ जैसे प्रमुख स्थानों पर सड़क का नामोनिशान मिट चुका है। पूरी सड़क पर दो से तीन फीट गहरे गड्ढे बन गए हैं, जिनमें बारिश का पानी जमा होने के कारण वाहन चालकों को गहराई का अंदाजा नहीं मिल पाता। भारी मालवाहक ट्रकों से लेकर ई-रिक्शा (टोटो) और दोपहिया वाहन आए दिन इन गड्ढों में पलट रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि राहगीर अपनी जान हथेली पर रखकर इस मार्ग से गुजरने को मजबूर हैं।
उल्लेखनीय है कि गंगा नदी के रास्ते माल ढुलाई के लिए तिनटंगा घाट का महत्व बढ़ा है। क्षमता से अधिक भारी वाहनों के लगातार गुजरने और जल निकासी (ड्रेनेज) की व्यवस्था न होने के कारण पिच पूरी तरह उखड़ चुकी है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पथ निर्माण विभाग ने लंबे समय से इस सड़क की सुध नहीं ली है। केवल कागजी मरम्मत या मामूली ईंट-रोड़े गिराकर खानापूर्ति की जाती है, जो पहली बारिश में ही बह जाती है। इस क्षेत्र में गंगा के बढ़ते जलस्तर और बाढ़ के बाद सड़कों का कटाव होना आम बात है, जिसके बाद समय पर पुनर्निर्माण कार्य नहीं कराया गया। सड़क की इस दुर्दशा ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता अब इस रास्ते पर आने से भी कतराते हैं। विधानसभा स्तर से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक को कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें दी गईं, लेकिन ढाक के तीन पात वाली स्थिति बनी हुई है।
जनप्रतिनिधियों द्वारा विभागीय प्रक्रिया और टेंडर का बहाना बनाकर लगातार मामले को टाला जा रहा है, जिससे जनता में भारी आक्रोश है। सड़क की बदहाली से नाराज स्थानीय ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। मुकेश कुमार और उदय (स्थानीय निवासी) ने बताया किसड़क इतनी खराब है कि आए दिन टोटो पलट रहे हैं और स्कूली बच्चे व महिलाएं घायल हो रही हैं। मरीजों को अस्पताल ले जाना किसी जंग जीतने जैसा है।
नवीन कुमार (व्यवसायी) का कहना है कि व्यापार पूरी तरह ठप होने की कगार पर है। जर्जर सड़क के कारण कोई भी मालवाहक गाड़ी समय पर नहीं पहुंचती और वाहनों के मेंटेनेंस का खर्च दोगुना हो गया है।
आक्रोशित ग्रामीणों ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि पथ निर्माण विभाग और जिला प्रशासन ने जल्द ही इस जर्जर 14 नंबर सड़क का पक्का निर्माण शुरू नहीं कराया, तो वे लोग मुख्य मार्ग को जाम कर उग्र आंदोलन और प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे।





