शिमला, 21 अगस्त (हि.स.)। राज्यसभा सांसद प्रो. (डॉ.) सिकंदर कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नक्सलवाद और उसके वैचारिक स्वरूप को लेकर दिए संदेश का समर्थन करते हुए कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा के सामने चुनौती केवल जंगलों में हथियार उठाने वाले नक्सलवाद तक सीमित नहीं है। कट्टर वामपंथी विचारधारा को बढ़ावा देने वाले नेटवर्क के प्रति भी सतर्क रहने की आवश्यकता है।
डॉ. सिकंदर कुमार ने शुक्रवार को एक बयान में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि दशकों तक सत्ता में रहने के दौरान पार्टी ने वोट बैंक और तुष्टिकरण की राजनीति के चलते कट्टर वामपंथी विचारों के प्रति नरम रवैया अपनाया। उन्होंने कहा कि ‘दिमागी नक्सलवाद’ या ‘अर्बन नक्सल’ की चुनौती को गंभीरता से समझना होगा। हिंसा को वैचारिक समर्थन देना, लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करना और युवाओं को कट्टरपंथी विचारों की ओर धकेलना भी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती है।
उन्होंने कहा कि मानवाधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संवैधानिक अधिकार हैं, लेकिन इनकी आड़ में हिंसा या संविधान विरोधी गतिविधियों को उचित नहीं ठहराया जा सकता। राष्ट्रीय सुरक्षा और देश की अखंडता से जुड़े मुद्दों पर सभी राजनीतिक दलों को एकजुट रुख अपनाना चाहिए।
सांसद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। सुरक्षा कार्रवाई के साथ नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, संचार, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आधारभूत ढांचे के विकास पर भी जोर दिया गया है। इससे नक्सलवाद की वैचारिक जमीन कमजोर हुई है।
उन्होंने कांग्रेस से तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति से ऊपर उठकर नक्सलवाद तथा हर प्रकार के हिंसक उग्रवाद के खिलाफ स्पष्ट रुख अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नए भारत में हिंसा और संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर करने वाली ताकतों के लिए कोई स्थान नहीं है।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील शुक्ला




