नई दिल्ली, 24 अगस्त (हि.स.)। एयरपोर्ट पर नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं से ठगी करने वाले गिरोह का मध्य जिले की साइबर थाना पुलिस ने पर्दाफाश किया है। आरोपित सोशल मीडिया पर फर्जी वेबसाइट बनाकर नौकरी के इच्छुक युवाओं को अपने जाल में फंसाते थे। इसके बाद एयरपोर्ट या विमानन क्षेत्र में नौकरी के लिए सात से 10 हजार रुपये तक रजिस्ट्रेशन और एडमिशन फीस के नाम पर वसूले जाते थे। पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड, उसके साथी, फर्जी वेबसाइट बनाने वाले डेवलपर और तीन टेली-कॉलर्स समेत छह आरोपितों को पकड़ा है।
मध्य जिले के पुलिस उपायुक्त रोहित राजबीर सिंह ने सोमवार को बताया कि मामले की शुरुआत 10 जून को हुई शिकायत से हुई। पीड़ित ने बताया कि इंस्टाग्राम पर उसे आइजीआइ एयरपोर्ट पर नौकरी का विज्ञापन दिखाई दिया था। विज्ञापन पर दिए गए लिंक पर उसने अपनी जानकारी भर दी। इसके बाद एक महिला ने खुद को एयरलाइन की एचआर बताते हुए उससे संपर्क किया। महिला ने वाट्सऐप पर पीड़ित का आधार कार्ड, पैन कार्ड, मार्कशीट और सीवी मंगवा लिया।
इसके बाद पीड़ित को बताया गया कि एयरलाइन में नौकरी के लिए एयरपोर्ट/एविएशन मैनेजमेंट का डिप्लोमा करना अनिवार्य है। इस बहाने उससे यूपीआइ के जरिये सात हजार रुपये जमा करा लिए गए। रकम लेने के बाद आरोपितों ने उसे फर्जी एडमिशन स्लिप, एनओसी और नौकरी का ऑफर लेटर भी भेज दिया। बाद में जब पीड़ित ने ठगी द्वारा बताई गई कंपनी के बारे में पता किया तो ऐसी कोई एयरलाइन अस्तित्व में नहीं मिली। आरोपितों के मोबाइल नंबर भी बंद हो गए। इसके बाद उसने साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत की।
शिकायत के आधार पर साइबर थाने में 14 जुलाई को एफआइआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। पुलिस टीम ने तकनीकी जांच, बैंक खातों और यूपीआइ लेनदेन की पड़ताल के आधार पर आरोपितों की पहचान की। जांच में ठगी का नेटवर्क नोएडा तक पहुंचा। पुलिस ने 18 अगस्त को ग्रेटर नोएडा निवासी संदीप कुमार और उसके साथी 27 वर्षीय अखिल कुमार को गिरफ्तार किया।
पूछताछ में सामने आया कि संदीप पहले फर्जी एविएशन जॉब कंपनियों में टेली-कॉलर के तौर पर काम कर चुका था। वहीं से उसने नौकरी के नाम पर ठगी का तरीका सीखा। बाद में उसने ‘प्रगति एयरवेज’ नाम से अपना फर्जी कारोबार शुरू किया। इसके बाद अखिल के साथ 50-50 साझेदारी में फर्जी कंपनियां शुरू कीं। दोनों ने नोएडा के गौर सिटी सेंटर मॉल में किराये पर कार्यालय लिया था।
आरोपितों ने पैसे देकर एक वेबसाइट डेवलपर से फर्जी वेबसाइट तैयार कराई। ऑनलाइन जॉब पोर्टल से नौकरी तलाशने वाले युवाओं का डाटा खरीदा जाता था। इसके बाद महिला टेली-कॉलर्स खुद को एयरलाइन की एचआर बताकर युवाओं को फोन करती थीं। नौकरी के लिए एविएशन डिप्लोमा या ऑनलाइन कोर्स जरूरी बताकर प्रत्येक अभ्यर्थी से सात से 10 हजार रुपये वसूले जाते थे। भरोसा कायम रखने के लिए फर्जी प्रमाणपत्र और नियुक्ति पत्र भेजे जाते थे।
पुलिस ने गिरोह से दो लैपटॉप, आठ मोबाइल फोन, आठ सिम कार्ड और नौकरी तलाशने वालों का डाटा रखने वाली दो रजिस्टर बरामद किए हैं। जांच में नौ अन्य शिकायतें भी इसी गिरोह से जुड़ी मिली हैं। पुलिस को आशंका है कि ठगी का शिकार हुए लोगों की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि कम रकम ठगे जाने के कारण कई पीड़ित शिकायत दर्ज नहीं कराते।
पुलिस के मुताबिक, शिकायतें आने के बाद आरोपितों ने नई फर्जी वेबसाइट और कार्यालय भी शुरू कर दिया था। गिरोह के सदस्य लगातार कार्यालय, वेबसाइट, मोबाइल फोन और सिम बदलकर पुलिस से बचने की कोशिश करते थे। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और ठगी की कुल रकम का पता लगाने में जुटी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी





