धमतरी , 24 अगस्त (हि.स.)। धमतरी जिला के ग्राम कोर्रा स्थित स्टेट बैंक ग्राहक सेवा केंद्र के संचालक पर 28 खाताधारकों से करीब एक करोड़ 75 हजार रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप लगा है। आरोप है कि संचालक खाताधारकों से बैंक में जमा कराने के नाम पर रकम लेता था, लेकिन राशि बैंक खाते में जमा करने के बजाय खुद हजम कर जाता था। इतना ही नहीं, वह लाखों रुपये की फर्जी एफडी तैयार कर खाताधारकों को उसका प्रिंट आउट भी देता था। लंबे समय तक रुपये वापस करने का भरोसा दिलाने के बाद जब रकम नहीं मिली तो परेशान खाताधारकों ने भखारा थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने आरोपित केशवराम साहू के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। एएसपी डीसी पटेल के अनुसार रायपुर जिले के ग्राम खोरपा निवासी केशवराम साहू ग्राम कोर्रा में स्टेट बैंक का ग्राहक सेवा केंद्र संचालित करता था। बैंक के ग्राहक सेवा केंद्र पर ग्रामीणों का भरोसा होने का फायदा उठाकर वह खाताधारकों से जमा करने के लिए रकम लेता था, लेकिन उसे बैंक में जमा नहीं करता था। कई खाताधारकों की पासबुक में मैन्युअल रूप से लेन-देन दर्ज किया गया, जबकि बैंक के सॉफ्टवेयर और मशीन में उसकी कोई एंट्री नहीं की गई। इसके अलावा खाताधारकों से एफडी कराने के नाम पर भी रकम ली गई और उन्हें फर्जी एफडी के प्रिंट आउट थमा दिए गए।
बताया गया है कि आरोपित खाताधारकों को यह भी कहता था कि वे अपनी एफडी की जानकारी किसी दूसरे व्यक्ति को न दें। इससे ग्रामीणों को लंबे समय तक फर्जीवाड़े की भनक नहीं लगी। धीरे-धीरे जब ग्राहक सेवा केंद्र की वास्तविकता सामने आई तो खाताधारकों में हड़कंप मच गया। रकम फंसने की जानकारी मिलने के बाद खाताधारकों ने संचालक से अपने रुपये वापस मांगे। आरोपित कई महीनों तक रकम लौटाने का आश्वासन देता रहा, लेकिन रुपये वापस नहीं किए। इसके बाद वह ग्राहक सेवा केंद्र में ताला लगाकर फरार हो गया। खाताधारकों का आरोप है कि उनकी करीब एक करोड़ 75 हजार रुपये की राशि अब तक वापस नहीं मिली है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर आरोपित की गिरफ्तारी के प्रयास शुरू कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार आरोपित केशवराम साहू स्वयं को स्टेट बैंक का ब्रांच मैनेजर बताता था। उसके रहन-सहन और रुतबे को देखकर ग्रामीण उस पर विश्वास करने लगे थे। उसने ग्राहक सेवा केंद्र को भी बैंक जैसा स्वरूप दे रखा था, जिसके कारण कई ग्रामीण उसे ही बैंक समझकर लेन-देन करते थे। इसी भरोसे का फायदा उठाकर वह रकम जमा कराने और फर्जी एफडी कराने का काम करता रहा।
मालूम हो कि ग्राहक सेवा केंद्र संचालक को निर्धारित सीमा के भीतर ही लेन-देन करने का अधिकार होता है। सामान्य तौर पर एक दिन में करीब 25 से 30 हजार रुपये तक जमा करने की सुविधा होती है। ग्राहक सेवा केंद्र संचालक को स्वयं एफडी करने का अधिकार नहीं होता। ऐसे में फर्जी एफडी बनाकर खाताधारकों को प्रिंट आउट देना गंभीर अनियमितता और धोखाधड़ी का मामला माना जा रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा





