कीव । रूस ने एक बार फिर यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए, जिनमें कम से कम छह लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए। राजधानी कीव सहित कई शहरों को निशाना बनाया गया, जहां आवासीय इमारतों, कार्यालयों और अन्य नागरिक ढांचों को नुकसान पहुंचा है।
कीव के मेयर के अनुसार, राजधानी पर हुए मिसाइल हमले में 12 लोग घायल हुए हैं, जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, तड़के लगातार दो बार जोरदार विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं और इसके तुरंत बाद पूरे शहर में हवाई हमले का सायरन बज उठा।
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने बताया कि रूस ने रातभर में 120 से अधिक ड्रोन और 12 मिसाइलें दागीं, जिनमें आधी बैलिस्टिक मिसाइलें थीं। उन्होंने कहा कि यूक्रेनी वायु रक्षा प्रणाली ने अधिकांश ड्रोन और मिसाइलों को मार गिराया, लेकिन बैलिस्टिक मिसाइलों को रोक पाना संभव नहीं हो सका।
जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर राहत एवं बचाव कार्यों के वीडियो साझा करते हुए कहा कि कई स्थानों पर नागरिक बुनियादी ढांचे को हवाई हमले की चेतावनी जारी होने से पहले ही निशाना बनाया गया। राजधानी कीव में अपार्टमेंट, कार्यालय और एक धार्मिक शिक्षण संस्थान को नुकसान पहुंचा है, जबकि अन्य प्रभावित क्षेत्रों में मलबा हटाने और राहत कार्य जारी हैं।
बांग्लादेश में मानसून का कहर, बाढ़ और भूस्खलन से 44 की मौत, 10 लाख से अधिक लोग प्रभावित
ढाका, 11 जुलाई (हि.स.)। बांग्लादेश में लगातार हो रही मूसलाधार मानसूनी बारिश ने व्यापक तबाही मचा दी है। बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में अब तक 44 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 10 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। देश के दक्षिण-पूर्वी हिस्से के सात जिलों में हालात गंभीर बने हुए हैं और लाखों लोग राहत एवं बचाव कार्यों पर निर्भर हैं।
आपदा प्रबंधन मंत्रालय के अनुसार चट्टोग्राम, कॉक्स बाजार, बंदरबन, रंगामाटी, खग्राछड़ी, मौलवीबाजार और हबीगंज जिलों में बाढ़ से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। करीब 2.68 लाख परिवार बाढ़ के कारण अपने घरों में फंस गए हैं और हजारों परिवार बाहरी दुनिया से कट गए हैं।
भारी बारिश के कारण कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई है। सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने से राहत सामग्री पहुंचाने में मुश्किलें आ रही हैं। कई परिवारों के घरों में अब भी पानी भरा हुआ है, जिससे खाना बनाना भी संभव नहीं हो पा रहा।
चट्टोग्राम निवासी नुरुल इस्लाम ने बताया, "हमारे घर में अब भी पानी भरा है। खाना बनाने का कोई साधन नहीं है। जो सूखा राशन था, वह खत्म हो चुका है और बिजली नहीं होने से बच्चों के साथ अंधेरे में रात गुजारनी पड़ रही है।"
सरकार ने राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है। सेना और नौसेना की टीमें नावों के जरिए प्रभावित इलाकों में खाद्य सामग्री, पीने का पानी, दवाइयां और अन्य आवश्यक वस्तुएं पहुंचा रही हैं।
आपदा प्रबंधन एवं राहत मंत्री इकबाल हुसैन ने कहा कि सरकार हरसंभव सहायता उपलब्ध करा रही है और जिन लोगों के घर जलमग्न हो गए हैं, उनसे निकटतम राहत शिविरों में जाने की अपील की गई है।
भारी बारिश के
कारण कॉक्स बाजार स्थित रोहिंग्या शरणार्थी शिविरों में भी भूस्खलन हुआ, जिसमें 16 शरणार्थियों, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी
शामिल हैं, की मौत हो गई। इन शिविरों में दस लाख से अधिक
रोहिंग्या शरणार्थी रहते हैं और पहाड़ी ढलानों पर बने अस्थायी आश्रय हर मानसून में
बड़े खतरे का सामना करते हैं।






